वेबसाइट का उद्देश्य

संपादकीय

परिचय

चिन्मय चन्द्रिका

लेख

फोटो गैलरी

 

------वेदान्त अध्ययन विधि

-चिन्मय तपोवन ट्रस्ट सिद्धबाड़ी द्वारा 9वें वेदान्त प्रशिक्षण सत्र का अध्ययन घर बैठे उपलब्ध

  ------आप इस वेबसाइट से लेख, प्रवचन डाउनलोड कर सकते है - डाउनलोड दिशा-र्निदेश

--समीक्षा - माइक्रोसोफ्ट कारपोरेशन की भाषा इण्डिया द्बारा

---कठोपनिषद्, द्रग्द्रश्य़ विवेक, तत्वबोध और ईशावास्य उपनिषद् पर प्रवचन की एम पी -3 सी डी प्राप्त करें।

 

पुस्तक

प्रश्न

प्रवचन

पितामह सदन

हिन्दी कार्यक्रम

सम्पर्क

       

शिष्य - संसार का हर्ता कौन है? गुरु - अपने आत्मा का ज्ञान संसार नाश करनेवाला है। शिष्य - मोक्ष हेतु कौन है? गुरु - अभी जो कहा, वही मोक्ष का हेतु है।   --------शेष भाग

दान कैसा हो और क्यों हो ?

दान देना ही कर्तव्य है - श्रीमद्भगवदगीता (अ0 17)

"दानशीलता -  इसके जरिए मैं दूसरों की जरुरतों को उतना ही महत्त्वपूर्ण मानने की कोशिश करता हूँ जितनी कि मेरी खुद की जरुरतें--------पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानन्द

- साधक उपनिषद् पर प्रवचन की एम पी -3 सी डी प्राप्त कर सकते है।

आगामी शिविर कार्यक्रम

1) ग्रैसफुल ऐजींग- इलाहाबाद

2) भागवत सप्ताह-द्वारका

3) गीता अध्याय 15 -कोलवन, लोनावाला के पास, पुणे

4) श्रीमद्भगवद्गीता- अध्याय - VII - पोर्टब्लेयर

 

नया-माइक्रोसोफ्ट पावर प्वाईन्ट स्लाईडकास्ट हिन्दी

---पुनर्जन्म और कर्म

 

 

 

 

 

 

नया

---ब्रह्मलीन स्वामी शंकरानन्द जी की पुण्य तिथि के अवसर पर चिन्मय तपोवन ट्रस्ट द्वारा

संचालित पितामह सदन, मंधना, कानपुर में आचार्य विश्वेश चैतन्य जी के निर्देशन में

6 दिवसीय साधना शिविर

दिनांक 24 सितम्बर से 29 सितम्बर 2008 तक

शिविर अनुदान राशी- रुपये 600 प्रति साधक, रुपये 1100 प्रति दम्पति रहने -खाने की सुवीधा सहित 

सम्पर्क

चिन्मय मिशन, 4 / 284, नवशील सदन, फ्लैट न0 -202, पार्वती बागला रोड़, कानपुर,

उत्तर प्रदेश-208002

    फोन - 0512- 2553313

- मेल-vedantijeevan@gmail.com -

-------10 सितम्बर 2008 को परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी का जन्म दिवस

और  29 सितम्बर 2008 को उनकी पुण्यतिथि है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हम श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 1 और 2 (स्वामी चिन्मयानन्द द्वारा लिखी पुस्तक) और इसी विषय पर स्वामी शंकरानन्द जी के प्रवचन की सी-डी का निःशुल्क वितरण कर रहे है।कृपया अपना पते के साथ मेल करे vedantijeevan@gmail.com-

 

 

 

 

 

 

 

कब किया गया इस वेबसाइट का संपादन

03-09-2008 08:06:57 AM

--------भगवान शंकराचार्य द्वारा लिखे गये ग्रन्थ "तत्त्वबोध" की हिन्दी मे व्याख्या परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी ने अपनी पुस्तक तत्त्वबोध में की है । यह वेदान्त दर्शन का ज्ञान कराने वाली प्रथम पुस्तक है। वेदान्त के सभी साधको को इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य़ करना चाहिए। हम साधकों को तत्त्व का ज्ञान कराने के लिए इस पुस्तक को अंशो में प्रस्तुत कर रहे है।

अंश संख्या -30 

पिछला अंश

पंचकोशातीत

    मदीयं शरीरं मदीयाः प्राणाः, मदीयं मनश्च मदीया बुद्धिः

    मदीयं ज्ञानमिति स्वेनैव ज्ञायते,

    तद्यथा मदीयत्वेन ज्ञातं, कटककुंडल गृहादिकं, स्वस्माद् भिन्नं,

    तथा पञ्च कोशादिकं, स्वास्माद् भिन्नं

    मदीयत्वेन ज्ञातमात्मा न भवति।

जैसे कटक, कुण्डल, गृह आदि अपने से भिन्न हैं, इसी प्रकार मेरा शरीर, मेरा प्राण, मेरा मन, मेरी बुद्धि, मेरा ज्ञान - इस रूप में भासित होते पंचकोश आदि भी अपने से भिन्न हैं। ये सब मेरे हैं इसलिए मैं (आत्मा)  इनमें से कोई नहीं हुँ।

व्याख्या - ज्ञाता और ज्ञेय में भेद है। घट का द्रष्टा घट से भिन्न होता है। वह अपने को घट नहीं समझता। इसी प्रकार यह गृह मेरा है तो भी मैं स्वयं घर नहीं हुँ। ये कंकण और कुण्डल मेरे हैं, ये पहने हुए वस्त्र मेरे हैं किन्तु मैं इनमें से कोई नहीं हुँ। इसी प्रकार यह शरीर, यह प्राण, यह मन मेरा है किन्तु मैं स्वयं शरीर आदि नहीं हुँ। पंचकोश या तीन शरीर और इनमें अनुभव होने वाले भूख-प्यास राग-द्वेष आदि नहीं हुँ। ये सब अनात्मा हैं।

सर्वाधिकार सुरक्षित - वेदान्तीजीवन (काँ) 2002