अर्जुनविषादयोग
अपने बंधुओं से युद्ध करे या न करे ? भ्रमित मनः स्थिति की इतनी सुंदर व्याख्या किसी भी ग्रन्थ मे नहीं है। यह मनुष्य की उस स्थिति को व्यक्त करता है जब उसका मन परिस्थितिवश असंतुलित और भ्रमित अवस्था का शिकार होता है । ऐसी अवस्था में किसी भी मनुष्य को यह अध्याय मार्गदर्शन प्रदान करता है।
अर्जुनविषादयोग की व्याख्या- 61/2
घंटे की इस प्रवचन में स्वामी जी ने अर्जुन की मनः
स्थिति को हमारे दैनिक जीवन में आने वाली
ऐसी भ्रमित अवस्था से तुलना करते
हुए उससे बाहर नीकलने के लीए मार्गदर्शन प्रदान
किया है।
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