भक्तियोग

 

इस अध्याय का नाम भक्तियोग है। इसका अध्यन करके सम्यक प्रकार से समझने से भगवान के प्रति हमारा प्रेम वास्तविक और पोषित होगा। इस प्रकार भक्ति साधना के विषय में हमारे मन में जो विपरीत धारणाये है वे भी दूर हो जायेगी। भक्ति का मार्ग कोई मनोवेगों का विस्फोट या अत्यधिक भावुकता का प्रदर्शन करना नहीं है। यह कोई तुच्छ,निरर्थक,उन्माद नहीं है। यह तो मनुष्य के व्यक्तित्व का खिल जाना है या निखर जाना है, और इसका उपाय है अपने जीवभाव को इश्वर के चरणों में सपर्पित करना तथा गहन ध्यान से अनुप्राणित क्षणों द्वारा नव चैतन्य प्राप्त करना। यही मानव का परम पुरुषार्थ है। 
 

8 घंटे की इस प्रवचन में स्वामी जी ने भक्तियोग के मार्ग के महत्व का विस्तार से व्याख्या किया है।

 

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