गुणत्रयविभागयोग

 

आत्मा को प्राप्त जीवभाव के सिद्धांत और प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन तो पूर्व अध्याय में किया गया है किन्तु जगत में दृश्यमान असंख्य प्रकार की विविधता का कोई विस्तृत स्पष्टीकरण उसमे नहीं दिया गया है वनस्पति पशु और मनुष्य जगत के मध्य का भेद स्पष्ट दृस्तिगोचार होता है इनमे से प्रत्येक जाती में भी विविधता देखी जाती है कोई दो प्राणी शारीरिक और मानसिक दृष्टी से सामान लक्षणों वाले नहीं दिखाई देते यदि प्रकृति सर्वत्र सामान है और परुष भी एक है तो इस विताओं से पूर्ण इस विविधता का हमें कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता है। इस अध्याय में इसका स्पष्टीकरण मिल जाता है। 
 

9 घंटे की इस प्रवचन में स्वामी जी ने परमात्मा के गुणों का विस्तार से व्याख्या किया है।

 

सुने इन्टरनेट आरकाईव में

 

डाउनलोड करे इन्टरनेट आरकाईव से जीप फाईल

 

एम पी 3 डाउनलोड करे विन्डो लाईव से

चिन्मय मिशन

चिन्मय मिशन एक आध्यात्मिक संस्था है जो गुरुदेव स्वामी चिन्मयानन्द जी  द्वारा स्थापीत की गई. शेष ...

वेदान्त अध्ययन