कर्मसंन्यासयोग
इस अध्याय का मुख्य विषय है - सन्यास का अर्थ, कर्मसंन्यासयोग की अभ्यास विधि ,इस साधना का फल तथा मनुष्य के व्यक्तित्व के विकास में इसका योगदान। यह पंचम अध्याय कर्मयोग तथा ध्यानयोग के मध्य एक सेतु के समान है, जो दोनों को जोड़ने का कार्य करता है। वैदिक विचार श्रुंखला में दोनों योगो को मिलाने वाली यह कड़ी सर्वथा विलुप्त है। गीता का यह अध्याय हमारे लिए उस कड़ी का पुनः अनुसन्धान कर देता है।
11 घंटे की इस प्रवचन में स्वामीजी ने
बहुत विस्तार से इस अध्याय की व्याख्या की है।
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