विभूतियोग

 

इस अध्याय का नाम है - विभूतियोग, क्योकि यह अध्याय परमात्मा के (क) ऐश्वर्य एवं (ख) उनकी सर्वव्यापकता का वर्णन करता है। इस अध्याय के वार्णनानुसार आत्मा इस बहुविध सृष्टि का सारतत्त्व है। इसलिए यहाँ हम देखते है कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं का परिचय निम्न दो प्रकार से कराते है (क) प्राणियों के सभी वर्गो अथवा जातियों में वे सर्वश्रेष्ठ और प्रमुख तत्त्व है (ख) तथा उसके बिना किसी भी वर्ग के प्राणी अपना अस्तित्व नहीं बनाये रख सकते है।

जो साधक निष्ठापूर्वक इस साधन मार्ग का अनुसरण करता है उसे मन तथा बुद्धि की सुक्ष्मग्राही क्षमता प्राप्त होती है। फलतः वह साधक जगत की वस्तुओं तथा प्राणियों में परमात्मा के ऐश्वर्य, क्रांति या शक्ति को पहचान पाता है, और वह यह भी जानता है की ये समस्त विभूतियाँ उस स्वयं  प्रकाशस्वरूप परमात्मा की रश्मियाँ है जो परिच्छिन्न उपाधियों के माध्यम से व्यक्त हो रही हैं।

 

11 घंटे की इस प्रवचन में स्वामी जी ने इस साधन मार्ग का विस्तार से व्याख्या किया है।

 

सुने इन्टरनेट आरकाईव में

 

 

डाउनलोड करे इन्टरनेट आरकाईव से जीप फाईल

 

 

 

एम पी 3 डाउनलोड करे विन्डो लाईव से

चिन्मय मिशन

चिन्मय मिशन एक आध्यात्मिक संस्था है जो गुरुदेव स्वामी चिन्मयानन्द जी  द्वारा स्थापीत की गई. शेष ...

वेदान्त अध्ययन