ईशावास्य उपनिषद् पर प्रवचन - आडियो सुने

 

परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी चिन्मय मिशन के महान विभूति में से थे। उनका सारा जीवन मिशन के आध्यात्मिक कार्यो को आगे बढ़ाने में लगा रहा। गुरुदेव के कई ग्रंथो का हिन्दी अनुवाद करना और पंचदशी जेसे ग्रन्थो की व्याख्या करना अपने जीवन में उनका मुख्य योगदान रहा है। वो पुस्तकों से नहीं अपने अनुभव से व्याख्या करते थे। हिन्दी अध्यात्मिक जगत को उनका योगदान अतुलनीय है।

 

चिन्मय मिशन के बाबाजी (परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी) जैसा की उनके शिष्य उन्हें प्रेमवश सम्बोधित करते थे, गुरुदेव के प्रिय शिष्यों में से थे। इसका बहुत श्रेय परम पूज्य स्वामी तेजोमयानन्द जी को जाता है, जो इस समय चिन्मय मिशन के प्रमुख है। उन्होनें ही इस महान सन्त को पहचान कर गुरुदेव से पहचान कराई थी। गुरुदेव से दीक्षा के बाद उनका सारा जीवन परिवर्तित हो गया। उपनिष्दों को तो जेसे वो जी रहे थे।

 

ईशावास्य उपनिषद् पर 1995 में बाबाजी (परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी) द्वारा मेरठ में शिविर का आयोजन हुआ था। परमात्मा कण कण में है। यह जगत ही परमात्मा का रुप है। शास्त्र कहते है जब तक गुरु के चरणों मे बैठकर श्रवण न किया जाये उपनिषद् सिर्फ शब्द है। अनुभव में नही आ सकता। ज्ञान जीवन में उतरे और अनुभव मे आये तब सफलता माने। अन्यथा बुद्धि विलास के लीए उपनिषद् की जरुरत नहीं।  

 

ईशावास्य उपनिषद् शुक्ल यज्ञुर्वेद सम्हिता का अन्तिम अध्याय है। इस उपनिषद् का नाम पहले मंत्र के पहले शब्द से लिया गया है। 12 घंटे के इस प्रवचन को अगर ध्यान से सुना जाए तो अनुभव दुर नहीं।

 

ईशावास्य उपनिषद् की वीडियो इन्टरनेट पर उपलब्ध है। किन्तु इसे और सुलभता के साथ साधकों को उपलब्ध कराने हेतु हमने इसे श्लोक दर श्लोक संकलित किया है । धीरे धीरे हम सारे प्रवचनों को ऐसे ही उपलब्ध कराएँगे । इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है की, जब भी साधकों को किसी विशेष श्लोक को दोहराने की जरुरत हो तो वो, आसानी के साथ इसे कर सकें । हम इस प्रोजेक्ट हेतु कनाडा के गोपाल मोहन जी का ह्रदय से आभार प्रकट करते है, की उनके संकल्प से हमें ये उपलब्ध हो पा रहा है।      

 

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चिन्मय मिशन

चिन्मय मिशन एक आध्यात्मिक संस्था है जो गुरुदेव स्वामी चिन्मयानन्द जी  द्वारा स्थापीत की गई. शेष ...

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