ध्यानदीप

 

उपासना सगुण और निर्गुण दो प्रकार की है। मंद अधिकारी अपनी साधना सगुण उपासना से प्रारंभ करते है। आगे चलकर वही निर्गुण का रूप धारण कर लेती है। सगुण उपासना भी दो प्रकार की है - प्रतिक उपासना और ध्येयानुसार उपासना । शालिग्राम में विष्णु, नर्मदा की बटिया में शिव और पीपल के वृक्ष में समस्त देवतओं का भाव रख कर उपासना करना प्रतिकोपासना है। बिना प्रतीक किसी देवता का स्वरुप अपने ह्रदय में स्मरण करना जैसे धनुर्धारी श्रीराम या मुरलीवादक श्रीकृष्ण के सुन्दर स्वरुप का चिंन्तन करना ध्येयानुसार उपासना है। इस प्रकार उपासना कई प्रकार की है और अधिकारी भेद से हर प्रकार की उपासना अपने स्थान में उपयोगी है। इस अध्याय में इसी का विवेचन है।
 

प्रवचन का समय- 16.30 घंटे

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ध्यानदीप-1

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