ब्रह्मानन्दगत विषयानन्द

 

"विषयानन्" नाम का यह अध्याय ब्रह्मानन्द प्रकरण का पाचवा तथा अंतिम अध्याय है और 'पंचदशी' ग्रन्थ का भी अंतिम पंन्द्रहवा अध्याय है विषयानंद वास्तव में विषय का आनंद नहीं है, वरण शांत मन में पड़ रहा ब्रह्मानन्द का प्रतिबिम्ब है। यह आनंद सांसारिक मनुष्य को सहज ही उपलब्ध है किन्तु अज्ञान के कारण उसे आनंद का रहस्य ज्ञात नहीं है। विषयानंद को विषय का आनंद समझने वाले अज्ञानी मनुष्य विषयों के मोह में पड़ते है और विषयों के कामना तथा उनके भोग के संसार चक्र में भटकते रहते है। विषयानंद को ब्रह्म का आनंद समझने वाले ज्ञानी पुरुष विषयों की कामना त्याग कर ब्रह्मज्ञान की कामना करते है और यहीं से वे ब्रह्मानन्द के द्वार में प्रवेश पाते है।
 

प्रवचन का समय- 7 घंटे

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विषयानन्द-1

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