रामचरितमानस-बालकाण्ड पर प्रवचन की एम पी थ्री

 
 

रामचरितमानस को आधार बनाकर वेदांत के सिद्धांतों का प्रतिपादन करना, बाबाजी (परम पूज्य स्वामी शंकरानन्द जी) जैसे विरले संत ही कर सकते है। पितामह सदन, चिन्मय मिशन, मंधना, कानपूर को बाबाजी ने अपना तपोभूमि बनाया था। बाबाजी का शरीर आज हमारे साथ नहीं है किन्तु आज भी उनके व्याख्यान उस स्थान पर गूंजते है।ऐसे विद्वान संत द्वारा रामचरितमानस बालकाण्ड की व्याख्या द्वारा वेदांत के सिद्धांतों का दर्शन एक अति दुलर्भ अनुभव है।         

 

सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रणाम जोरि जुग पानी।।

 

(रामचरितमानस - बालकाण्ड)

 

ऊँ ईशा वास्यमिद् सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।

  (ईशा उपनिषद्)

 

उपरोक्त दोनों में अगर समानता नहीं है तो बस भाषा का। वेदान्तियो के लिए तो रामचरितमानस भी वेदांत का ग्रन्थ है। गोस्वामी तुलसीदास जी रामानंदी संप्रदाय के होते हुए भी, रामचरितमानस की रचना करते हुए कहीं भी दूसरे मत का खंडन करते हुए नहीं प्रतीत होते है। यही उनकी महानता है। आज हर संप्रदाय के लोग इस महान ग्रन्थ से प्रेरणा ले रहे है।       

 

प्रस्तुत है संपूर्ण रामचरितमानस बालकाण्ड की व्याख्या 
 

 

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इस पृष्ठ को देखते रहें । संपूर्ण रामचरितमानस बालकाण्ड की व्याख्या 60 सी डी मैं पूर्ण होगी हम श्री प्रदीप नायक , चिन्मय मिशन, सतना,मध्य प्रदेश का हार्दिक आभार प्रकट करतें है। उनकी वजह से ही यह रिकॉर्डिंग हमें कैस्सेट से सी डी के रूप मैं मिल पाई है। जैसे जैसे यह बहुमूल्य प्रवचन कैस्सेट से सी डी के रूप मैं रूपांतरित होती जायेगी, हम इस पृष्ठ को अपडेट करते जायेंगे ।      

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