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सदगुरुवे नमः |
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ॐ सह नावबतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यं करवावहै, तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः । |
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"हे परमात्मन्, आप हम दोनों गुरु शिष्य की साथ-साथ रक्षा करें, हम दोनों का साथ-साथ पालन करें, हम दोनों साथ-साथ ही शक्ति प्राप्त करें, हम दोनों की पढी हुई विद्या तेजोमयी हो और हम दोनों परस्पर द्वेष न करें।" अधिक से अधिक लोगों को अधिक से अधिक समय के लिए अधिक से अधिक सुख पहुँचाना ही हमारा धमॅ है। अतः इस वेबसाइट का उद्देश्य हिन्दी वेबसंसार को भली भाँति परीक्षा किए हुए वेदान्ती जीवन दशॅन का ज्ञान कराना है। इसका अनुसरण करने से संसार का कोई भी व्यक्ति क्रमशः विकास करते हुए आनन्द के उच्च स्तर का श्रेष्ठतम् जीवन जी सकता है। |
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