जगत् की रचना  

 

आत्मज्ञान प्राप्त करने में जगत् की रचना का ज्ञान सहायक हो सकता है। बाहर आकाश आदि पंच भूतों का संघात रूप जगत् है, और अपने अन्दर प्राण, मन, बुद्धि आदि का सूक्ष्म जगत् है। यह समस्त जगत् अनात्मा है। आत्मा इस जगत् का प्रकाशक और ज्ञाता है।

 

जगत् 24 तत्वों का संघात है। ये तत्व है

 

तत्व

रूप

पंचमहाभूत

पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु तथा आकाश पंचमहाभूत कहलाते है।

पांच प्राण

प्राण, अपान, समान, व्यान और उदान पांच प्राण है।

पांच कर्मेन्द्रियाँ

वाक्, हाथ, पैर, गुदा और उपस्थ पांच कर्मेन्द्रियाँ है।

पांच ज्ञानेन्द्रियाँ

कान, त्वचा, नेत्र, जिह्वा और नासिका पांच ज्ञानेन्द्रियाँ है।
चार अन्त: करण चतुष्ट्य मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त चार अन्त: करण चतुष्ट्य है।

 

इन तत्वों की तीनों काल में सत्ता नहीं है। इसलिए ये असत् हैं। इनकी रचना माया ने की है। 

 

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